दीपक भारती की तीन कविताएँ
नयी पीढ़ी को सलाम डंडों, घूंसों, बूटों, ‘कमेंटों’ का जिस अंदाज में जवाब दिया, क्रूर पुलिसिया मानसिकता का जिस बेबाकी से पर्दाफ़ाश किया, दमन के खतरनाक इरादों का जैसा मज़ाक उड़ाया, और अहंकारी सत्ता को घुटनों पर ला टिकाया, गोदी मीडिया के रचे प्रपंचों को जैसे नंगा किया, उत्पीड़न-दमन को जिस ढंग से हँसी-ठठ्ठे में उड़ाया, सचेतन भारत-भारतीयता की जो बुलंद झलक दिखाई, न्यायोचित माँगों पर जो संकल्प, एकता और



