కవిత్వం

दीपक भारती की तीन कविताएँ

नयी पीढ़ी को सलाम डंडों, घूंसों, बूटों, ‘कमेंटों’ का जिस अंदाज में जवाब दिया, क्रूर पुलिसिया मानसिकता का जिस बेबाकी से पर्दाफ़ाश किया, दमन के खतरनाक इरादों का जैसा मज़ाक उड़ाया, और अहंकारी सत्ता को घुटनों पर ला टिकाया, गोदी मीडिया के रचे प्रपंचों को जैसे नंगा किया, उत्पीड़न-दमन को जिस ढंग से हँसी-ठठ्ठे में उड़ाया, सचेतन भारत-भारतीयता की जो बुलंद झलक दिखाई, न्यायोचित माँगों पर जो संकल्प, एकता और
కవిత్వం

दीपक भारती की तीन कविताएँ

राम-राज्य का डर मुझे राम-राज्य से डर लगता है क्योंकि....  वाल्मीकि के अनुसार राम के राजत्व में ही स्वयं राम ने शंबूक का वध किया,  सीता को प्रताड़ित किया,  दासों, शूद्रों, आदिवासियों.... को अपमानित किया।  गाँधी के राम-राज्य में  शूद्र, दलित, आदिवासी, स्त्री....   पिछड़ों में भी पिछड़े ही बने रहे और सत्ता का सुख अगड़े, सवर्ण व वर्चस्ववादी पौरुष ही लेते रहे। और आज के राम-राज्य में? यहाँ तो बहुसंख्यक